भोर होने के पहले ही सारथि ने कृष्ण को चेताया। कृष्ण ने रात्रि शिला पर ही बितायी थी। सारथि सुघड़ धनुर्धर व् तल्वार्बाज़ था। कृष्ण का सर्वश्रेष्ठ अंगरक्षक। अब आगे रथ ले जाना कृष्ण ने उचित नही समझा। इस बीहड़ जंगल में वे एक भी संकेत देना नही चाहते थे। दुर्योधन ने अवश्य ही गुप्तचरों का जाल बिछाया होगा। अब तक तो पूर्ण द्वीप के प्राय : सभी नरेशों के पास शकुनी ने संदेश अथवा धमकी पंहुचा दी होगी। पांडवो को समर्थन करने वाला दुर्योधन के कोप का भागी होगा। इस स्थिति में वैसे भी शायद ही कोई समर्थन में आए। द्रौपदी कांड ने पांडवो के विरुद्ध वातावरण खड़ा कर दिया है। स्वयं बलराम पांडवो के विरुद्ध है। गुप्तचरों ने यहाँ तक कहा है की भीष्म पितामह, गुरु द्रोन, व् अंगनरेश कर्ण पांडवो के विपक्ष में ही है। समय जैसे पूर्णतया दुर्योधन के पक्ष में व् पांडवो के विरुद्ध हो गया है। वे अकेले ही इस समय इस समस्या से जूझ रहे है।
कृष्ण का स्वभाव नही है चिंतित होना। वे एक मुस्कान रख कर बड़ी से बड़ी विपदा का सामना कर पाते है। बड़ी बात है यह है की उनका गणित उन्हें कभी धोखा नही देता। जैसे सभी कुछ वे अपनी अंगुलियों पर गिन कर बता सकते है की भविष्य में क्या होने वाला है। जैसे की यह सूर्य भी उनके ही इशारो पर निकलता या ढलता हो।
बीहड़ वन का अन्धकार भोर के सूर्य की किरणों से संघर्ष कर रहा है। वन इतना गहन है की सूर्य भी मंद पड़ जाता है। कृष्ण ने स्वयं को संयंत किया व् अंगरक्षक को दूर ही रहने का संकेत कर पांडवो के निवास स्थल की ओर निकल गए।
"देवी, ब्रह्मण भूखा है" भीक्षाम देही।
"देवी, भीक्षाम देही। "
कृष्णा चौक कर उठ खड़ी हुई। अर्जुन सचेत हो उठ बैठे। सामने उषाकाल में एक ब्रह्मण ऐसे वन में, अर्जुन हाथ जोड़े सशंकित से सामने प्रस्तुत हो गए।
कृष्ण ने चिर परिचित मुस्कान बिखेर दी। अर्जुन हतप्रभ से कृष्ण की गंभीर आँखों पर केंद्रित हो उठे। देवकीनंदन आप?
कृष्णा मुस्काती हुई बाहर आई। हाथो में खाली कटोरा लिए। हे सखा, अब तो केवल अक्षत का एक ही दाना बचा है। मुझ अभागन के भाग्य में इतना भी नही के नारायण स्वरुप रक्षक को भोजन कराऊँ।
कृष्ण ने कृष्णा के अश्रु हथेली में ले लिए। "कृष्णा" तुम्हारे हाथ से यह अक्षत का एक दाना भी मेरी क्षुधा को मिटा देगा। द्रवित ह्रदय से कृष्ण ने फफकती कृष्णा को थाम लिया।
पञ्च पांडव सर झुकाए कृष्ण के समक्ष प्रस्तुत हो गए।
कृष्ण के गंभीर नेत्र अर्जुन के लिए सूचक थे की युद्ध की तैयारी अतिशीघ्र करनी होगी। आज का दिन आगे की रणनीति व् रणभूमि तैयार करने में जाएगा। कृष्ण द्वीप का मानचित्र बिछा कर त्रिन्पत्र पर बैठ गए।
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