"सारथी, रथ जल्दी आगे बढाओ! संध्या के काले बादल घने होते चले है" कृष्ण अकेले ही द्वारिका से बिना किसी को सूचित किए चले है।
रुक्मिणी परेशान हो गई है। न जाने कब क्या घटना घटित हो जाती है, और चल पड़ते स्वामी प्रस्थान पर। अब तो आदत भी हो गई है। जब से विवाह हुआ है, कभी दो दिन का बसेरा श्रीकृष्ण ने द्वारिका में शांतिपूर्वक नही किया है, कभी कोई सभा, तो कभी कोई यात्रा, कोई कभी आखेट, तो कभी राज्य का दौरा। और कुछ नही तो भइया बलराम की मयकी आदत से झुंझलाते श्री कृष्ण। वैसे कम ही झुंझलाते है वे पर बलराम को देखते है तो चिंतित हो जाते है श्रीकृष्ण!
द्वारिका में एक भी व्यक्तित्व ऐसा नही दिखाई पड़ता जो इस महत्वपूर्ण प द को संभालले। रुक्मिणी द्वारिका की महारानी है, और श्रीकृष्ण उस समराज्य के करता धरता। कभी कभी सोचती है कही जानबूझ कर तो कृष्ण राज्य से बाहर नही रहते है वे? रुक्मिणी पतिव्रता है। कृष्ण ने सत्यभामा, रोहिणी को भी भार्या बनाया है। अपने समाधान के लिए रुक्मिणी बस इतना ही सोच पाती है की ये विवाह महत्वपूर्ण थे राजनैतिक दृष्टि से। सत्यभामा से कृष्ण ने पाई एक बड़ी महानायकों की टोली, व् रोहिणी से पाई एक स्यमन्तक मणि। अत्यन्त मनोहर, अति दुर्लभ।
इतने में जानने लगी है वह अपने स्वामी को। जब से पदभार संभाला उन्होंने एक भी मौका नही जाने दिया। रात दिन किस तरह पिता वासुदेव की नगरी को सौंदर्य व् समृद्धि के चरम शीर्ष पर पहुचाया जाए। रुक्मिणी झरोखे में बैठ इंतज़ार करने लगी पति के संदेश का।
कृष्ण नही चाहते थे, उनके निकलने का अंदेशा भी हो किसी का। रूप बदल कर निकले है वे। एक ब्रह्मण के वेश में खूब जंच रहे है वे।
द्रौपदी को रसद, वस्त्र, व् पांडवो को शस्त्र पहुचाने का काम स्वयं ही करना श्रेयस्कर समझा कृष्ण ने। बारह वर्ष की अवधि चुपचाप निकालनी है, यदि इससे पहले पहचाने गए तो हस्तिनापुर का एक पत्थर भी नही मिलेगा कहलवाया है राजकुमार दुर्योधन ने। धर्मपुत्र युधिष्ठिर ने सर झुका कर मान लिया है, वे निकल पड़े अपने अनुजो व् भार्या समेत।
वे होते तो हस्तिनापुर का लेखा जोखा ही कुछ और होता। वे उलझाते जा रहे है इन सबमे।
रुक्मिणी अक्सर पूछ बैठती है स्वामी आप युद्ध किस तरह से रोक पाएंगे? क्यो चिंतित होते है? उत्तर में एक मुस्कान दे कर कृष्ण चुप हो जाते है। वे अच्छी तरह से जानते है नही ताल पाएंगे इस युद्ध को। प्रकृति के नियम सख्त है। वह जैसे को तैसा कर के देती है।
........क्रमशः
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